माहेश्वरी समाज जिला इंदौर के 9 में से 8 क्षेत्रों के निर्वाचन संपन्न, 2-3 क्षेत्रों में कार्यकारी मंडल सदस्यों के मतदान से निर्वाचन, तो शेष सभी में सहमति व समन्वय से निर्विरोध चयन
इंदौर। पश्चिमी मध्य प्रदेश प्रादेशिक माहेश्वरी सभा के अंतर्गत इंदौर जिले की 9 तहसीलों (क्षेत्रों) में से 8 क्षेत्रों के निर्वाचन “सफलतापूर्वक” सम्पन्न हो गए हैं। इस अवसर पर प्रदेश सभा सहित विभिन्न जिला सभाओं, वरिष्ठ समाजबंधुओं एवं गणमान्य जनों द्वारा नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।
निर्वाचन परिणामों के अनुसार विभिन्न क्षेत्रों में अध्यक्ष एवं सचिव पदों पर निम्नलिखित पदाधिकारी निर्वाचित हुए—
बालाजी क्षेत्र:
अध्यक्ष – रितेश राठी, सचिव – विजय जाजू
अन्नपूर्णा क्षेत्र:
अध्यक्ष – मनोज कुइया, सचिव – अक्षत झंवर
बिजासन क्षेत्र:
अध्यक्ष – महेश राठी, सचिव – उमेश समदानी
दक्षिण क्षेत्र:
अध्यक्ष – अनिल मंत्री, सचिव – डॉ. निलेश माहेश्वरी
मध्य क्षेत्र:
अध्यक्ष – शैलेन्द्र (भैया), सचिव – गोविंद झंवर
हाइवे क्षेत्र:
अध्यक्ष – राजेश गट्टाणी, सचिव – सीए विकास माहेश्वरी
संयोगितागंज क्षेत्र:
अध्यक्ष – संजय चांडक, सचिव – सौरभ राठी
मेघदूत क्षेत्र:
अध्यक्ष – ईश्वर कलंत्री, सचिव – वीरेंद्र चौधरी
हालांकि, विधान अनुसार आगामी सत्र (2026–2029) के लिए इन पदाधिकारियों का निर्वाचन पिछले सत्र (2023–2026) के 71/51 सदस्यीय कार्यकारी मंडल द्वारा एक सीमित दायरे में ही होना था, और उम्मीदवार भी उसी सीमित दायरे तक बंधे हुए थे। ऐसे में सामान्य समाजबंधुओं के लिए यह पूरी चुनावी प्रक्रिया कहीं न कहीं मात्र “दूर से देखने” की व्यवस्था बनकर रह गई। परिणामस्वरूप, समाज में इन चुनावों को लेकर व्यापक उत्साह या सक्रिय भागीदारी का अभाव स्वाभाविक रूप से नजर आया। इतना ही नहीं, चयनित उम्मीदवारों के प्रति भी वह उत्साह देखने को नहीं मिला, जो सीधे समाजबंधुओं द्वारा किए गए प्रत्यक्ष निर्वाचन में सामान्यतः दिखाई देता है।
विधान की इस व्यवस्था को सहज कहना शायद शब्दों के साथ न्याय नहीं होगा। जटिल, सीमित और पूर्व-निर्धारित दायरे में बंधी इस प्रक्रिया ने चुनाव को उतना खुला और प्रतिस्पर्धी मंच नहीं रहने दिया, जितना किसी भी लोकतांत्रिक प्रणाली में अपेक्षित होता है। परिणामतः सामान्य समाजबंधु स्वयं को कहीं न कहीं ठगा हुआ महसूस करता है। ऊपर से अधिकांश क्षेत्रों में मतदान की औपचारिकता तक की आवश्यकता नहीं पड़ी—कहीं “समन्वय” के नाम पर, तो कहीं “सर्वसम्मति” के नाम पर तथाकथित “मजबूत” उम्मीदवारों का निर्विरोध चयन सुनिश्चित कर लिया गया। नतीजतन, 8 क्षेत्रों में से 2-3 क्षेत्रों को छोड़कर शेष सभी निर्वाचन बिना किसी वास्तविक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सम्पन्न घोषित कर दिए गए।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व आगामी सत्र (2026–2029) के लिए कार्यकारिणी मंडल के गठन में भी 9 में से 7 क्षेत्रों के 71/51 सदस्यीय मंडलों का चयन निर्विरोध ही संपन्न हो चुका था। वहीं, पूर्वी क्षेत्र का चुनाव निरस्त होने के बाद दिनांक 26.05.2026 को केवल बिजासन क्षेत्र में वास्तविक अर्थों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया देखने को मिली, जहाँ समाजबंधुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया और बिना किसी दबाव, समन्वय या कृत्रिम “सहमति” के, अपनी पसंद के 71 सदस्यीय कार्यकारिणी का निर्वाचन किया।
बिजासन क्षेत्र के परिणामों ने स्पष्ट कर दिया कि समाज में आपसी मतभेद या विभाजन का भय दिखाकर “निर्विरोध” के नाम पर पसंदीदा उम्मीदवारों का चयन करने की प्रवृत्ति (थोपने जैसी भावना) से कहीं बेहतर यह है कि जिम्मेदार समाजबंधुओं को स्वयं अपने मताधिकार का उपयोग कर योग्य प्रतिनिधियों का चुनाव करने दिया जाए।
“निर्विरोध” का तात्पर्य यह होना चाहिए कि यदि कोई उम्मीदवार वास्तव में क्षेत्र या जिले में अत्यधिक लोकप्रिय है अथवा समाजबंधुओं की पहली पसंद है, तो उसके सामने कोई अन्य उम्मीदवार स्वाभाविक रूप से खड़ा ही नहीं हो। लेकिन वरिष्ठों के दबाव में कराया गया निर्विरोध चयन किसी अन्य के अधिकारों का खुला हनन है, जिसमें कई बार मजबूरी या दबाववश उम्मीदवार अपना नाम वापस लेने को विवश हो जाता है। और शायद यही कारण है कि इन संगठनों के कार्यक्रमों में अब सामान्य समाजजनों की उपस्थिति लगातार कम होती जा रही है।
वैसे भी इन परिणामों ने “निर्विरोध” की आड़ में समाजबंधुओं के लोकतांत्रिक अधिकारों पर जबरदस्ती की जा रही कटौती पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है — जिसके उत्तरस्वरूप अब जिम्मेदारों को इन विसंगतियों को दूर कर निर्वाचन प्रक्रिया को आसान, सर्वसमावेशी और लोकप्रिय बनाना ही होगा, ताकि अधिक से अधिक समाजबंधुओं की भागीदारी से निर्वाचन सुनिश्चित हो सके। साथ ही, इन विसंगतियों से जुड़े ये जटिल और उबाऊ नियम चुनावी माहौल में कई बार उम्मीदवारों के आपसी विवादों तथा कभी-कभी चुनाव प्रभारियों के साथ मतभेदों का कारण भी बनते हैं, जिन्हें समय रहते दुरुस्त किया जा सकता है।
समाजजनों ने सभी नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के सफल, प्रेरणादायी एवं समाजहित में समर्पित कार्यकाल के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त की हैं। सभी क्षेत्रों की नवनिर्वाचित कार्यकारिणी टीमों को समाजजनों ने बधाई देते हुए यह अपेक्षा भी व्यक्त की है कि भविष्य में संगठनात्मक व्यवस्थाएँ ऐसी हों, जिनमें स्पष्ट रूप से सभी समाजबंधुओं की व्यापक भागीदारी, पारदर्शिता और वास्तविक लोकतांत्रिक भावना का अनुभव समाज के प्रत्येक सदस्य को हो सके।
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